

प्रमुख जानकारी (11 मार्च 2026)
आयोजन का समय व स्थान: यह अनूठी यात्रा आज दोपहर 2:30 बजे चित्तौड़ वालों की हवेली से शुरू हुई।
मार्ग: यह सवारी रेलवे स्टेशन, गोलप्याऊ चौराहा, भीमगंज थाना, सर्राफा बाजार और बड़े मंदिर के पीछे से होते हुए बाहला स्थित गंतव्य तक पहुंची।
परंपरा: होली और शीतला अष्टमी के इस उत्सव में एक जीवित युवक को अर्थी पर लिटाया जाता है। लोग रंग-गुलाल नकली नोटो को उड़ाते और हंसी-ठिठोली करते हुए शवयात्रा निकालते हैं।
रोचक तथ्य: यात्रा के अंत में, श्मशान पहुँचने से पहले ही अर्थी पर लेटा ‘मुर्दा’ (युवक) अचानक कूदकर भाग जाता है और उसकी जगह एक पुतले का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया जाता है।





